हिंदी कहानी मनहूस शकल | Manhoos Shakal

यह कहानी मनहूस शकल जैसे अंधविश्वास के बारे में है। कैसे शेर राज इस मनहूस शकल के अंधविश्वास की चपेट में आ जाते है और फिर कैसे वो इससे बाहर निकलते है। तो आइये पढ़ते है ये सब कैसे शुरू होता है और शेर राज अंधविश्वास से कैसे बचते है। 

सुंदरवन जंगल के राजा शेर राज एक दिन सवेरे-सवेरे सो कर उठे। आँख मलते हुए जैसे ही बाहर आये तो उनकी नज़र गुफ़ा के बाहर सोये हुए लक्क्ड़बग्घे के बच्चे पर पड़ी। शेर राज को ज़ोर से उबासी आयी तो उसके मुँह से गर्जन निकल पड़ी। शेर राज की गर्जना सुनते ही लक्क्ड़बग्घे के बच्चे की नींद खुली। वो घबरा गया और वहाँ से भाग खड़ा हुआ। 

हिंदी कहानी मनहूस शकल | Manhoos Shakal
हिंदी कहानी मनहूस शकल | Manhoos Shakal

सियार और शेर राज पुरे दिन शिकार की तलाश में घूमते है लेकिन शिकार मिलना तो दूर शिकार के दर्शन तक नहीं होते। उस दिन शेर राज को भूखे पेट ही सोना पड़ता है। सवेरे-सवेरे वो जैसे ही गुफा से बाहर निकलते है, एक बार फिर उनकी नज़र बाहर सो रहे लक्क्ड़बग्घे के बच्चे पर पड़ती है। ये देख वो जैसे ही डकार मारते है तो लक्क्ड़बग्घे के बच्चे की नींद खुल जाती है और वो शेर राज को देखते ही वहाँ से सटपट भागता है। तभी दूसरी तरफ से सियार वहाँ आता है। 

सियार :-        शेर राज की जय हो। रात कैसी गुज़री महाराज। 
शेर राज :-     भूखे पेट नींद नहीं आयी। आज तो कैसे भी शिकार करना ही पड़ेगा। 
सियार :-        तो चले महाराज। 

और कल की तरह आज भी शेर राज और सियार अपने ही नहीं पड़ोस के भी जंगल में घूम कर आये, मगर कोई शिकार उनके हाथ नहीं लगा। आज फिर शेर राज और सियार को खाली पेट लौटना पड़ा। 
सियार :-          महाराज ये  हमारे साथ क्या हो रहा है ? पुरे दिन जंगल की ख़ाक छानने के बाद भी पंजे और                               जबड़े में कुछ नहीं लगा। 
शेर राज :-       हां। लगता है आज की रात भी खाली  पेट बितानी पड़ेगी। 

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 फिर उनकी नज़र गुफा के बाहर सो रहे लक्क्ड़बग्घे के बच्चे पर पड़ती है। तभी सियार उसे पकड़ लेता है। सियार के पकड़ते ही वो छूटने के लिए कू-कू करता मचलता है पर सियार उसे नहीं छोड़ता है। यह देख शेर पूछता है :-

शेर राज :-      सियार, यह क्या कर रहे हो?
सियार :-         महाराज, मैंने रात भर सोचा कि इतनी दौड़-भाग करने के बाद भी अपने इतने बड़े जंगल में ही                           नहीं पड़ोस के जंगल में भी कुछ हाँथ क्यों नहीं लगा। 
शेर राज :-       क्यों?
सियार :-          इसकी मनहूस शकल की वजह से। आप रोज सवेरे-सवेरे उठते ही इसकी शकल देख लेते हो                            और पूरा दिन मनहूसीयत में गुज़रता है और यह है की कमबख़्त आपकी गुफा के मोहाने पर ही                          आ कर सो जाता है। 

शेर राज :-       तुम सही कह रहे हो सियार। इसे हमारी गुफा में कैद कर दो। हम इसे इसकी मनहूस शकल की                         सज़ा देंगे। हम इसी का शिकार करके खाएंगे। 
बच्चा :-            नहीं! नहीं! मुझे छोड़ दो। मुझे छोड़ दो। मम्मी, मम्मी। पापा, पापा। बचाओ, बचाओ। 

लक्क्ड़बग्घे के बच्चे की आवाज़ उसके मम्मी-पापा तक पहुंच जाती है। 

पापा :-              अरे! ये तो हमारे बच्चे की आवाज़ है। 
मम्मी :-              हां। लगता है कि वो मुसीबत में है। आवाज़ शेर राज की गुफा की तरफ़ से आ रही है। चलो। 

वो दोनों शेर राज की गुफा के पास पहुंचते है। 
पापा :-                शेर राज हमने अपने बच्चे की आवाज़ यहाँ से सुनी। 
शेर राज :-          अच्छा! तो तुम दोनों हो उस मनहूस शकल के माँ-बाप। 
मम्मी :-               मनहूस शकल? 
सियार :-              हां। दो दिनों से महाराज उठते ही उसकी मनहूस शकल क्या देखते है, पुरे दिन इन्हे कोई                                   शिकार नसीब नहीं होता। दो दिनों से महाराज भूखे सो रहे हैं। आज उसे उसकी मनहूस                                     शकल की सजा मिलेगी। 

मम्मी :-               नहीं, नहीं, मेरे बच्चे की शकल मनहूस नहीं है। उसे माफ़ कर दो। 
शेर राज :-           एक बार हमने जो कमिटमेंट कर दी  तो कर दी, फिर हम अपने-आप की भी नहीं सुनते।                                  तुम्हारे बेटे की शकल मनहूस है तो है और उसे इसकी सजा मिलेगी। 

फिर पुरे दिन मिस्टर एंड मिसिस लक्क्ड़बग्गा परेशानी में घूमते रहे। उन्होंने जा कर हाथी राज से मदद माँगी पर हाथी राज ने भी इंकार कर दिया। फिर उन्होंने गैंडे से भी पूछा लेकिन गैंडे ने भी शेर राज से पंगा लेने के लिए इंकार कर दिया। ऐसे ही कोई भी शेर राज़ के खिलाफ बोलने को तैयार नहीं हुआ। दोनों हताश हो कर एक पेड़ के नीचे आ कर बैठ गए। 
पेड़ पर से बंदर ने उन दोनों पति-पत्नी को इतना निराश देखा तो उसका कारण पूछा तो दोनों ने सारी बात कह सुनाई। सारी बात सुन कर बन्दर ने कहा :-

बन्दर :-                 सुनो लक्क्ड़बग्घे भाई। तुम तो क्या सारा जंगल जानता है कि शेर राज से टकराना या उनके                                खिलाफ़ बोलना अपनी मौत को दावत देना है। मैं वादा तो नहीं कर सकता लेकिन एक                                      कोशिश ज़रूर कर सकता हूँ। 
लककड़बग्घा :-     जब हाथी राज और गैंडे ने कोई कोशिश नहीं की तो तुम क्या कोशिश करोगे भाई। तुम तो                                  शेर के एक ही पंजे के शिकार हो। 
बन्दर :-                 यही तो तुम्हारी ग़लतफहमी है। हर काम बड़े शरीर से नहीं होता, कुछ छोटे दिमाग से भी                                  होता है। 

हिंदी कहानी मनहूस शकल | Manhoos Shakal
हिंदी कहानी मनहूस शकल | Manhoos Shakal

आज भी पूरा दिन घूमने के बाद भी जब शेर को कोई शिकार नहीं मिला तो सियार की कही बात शेर राज को याद आते ही वो आग बबूला हो गया। 

शेर राज :-              अब तो मुझे भी यकीन हो गया है सियार। उस लक्क्ड़बग्गे के बच्चे की शकल इतनी मनहूस                                है कि अगर दो दिन और देख लिया तो मैं भूखा ही मर जाऊंगा 
सियार :-                 वही तो! इससे पहले की आप मरे, आप उसी की दावत उड़ा लो। 

फिर बन्दर उनके पास आता है और बोलता है :-

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बन्दर :-                   महाराज की जय हो। महाराज की जय हो। 
सियार :-                  तुम यहाँ क्यों आये हो? 
बन्दर :-                    जिसे देखो वही कह रहा है कि शेर राज की शकल बड़ी मनहूस है। 
शेर राज :-                क्या?
बन्दर :-                   हां महाराज। इसलिए कुछ लोग तो जंगल छोड़ कर पड़ोस के जंगल के राजा के अधीन                                      होने जा रहे है। 

सियार :-                 अबे! पर कौन मर गया इनकी शकल देख कर?
बन्दर :-                   मरा नहीं पर मरने वाला है। लोग कह रहे है इतने दिनों से लक्क्ड़बग्घे का बच्चा ज़िंदा था                                   लेकिन दो दिनों से उसने नींद खुलते ही शेर राज की शकल क्या देख ली, उसे तो मौत की                                   सजा दे दी। अब वो मरने वाला है। अगर हम भी सुबह-सुबह शेर राज की शकल देख लेंगे                                 तो हमारे साथ भी ऐसा हो सकता है। महाराज, यह तो आपके राज-पाठ के लिए खतरे का                                   विषय है। आँखे खोलिये महाराज। आँखे खोलिये। वरना इस जंगल की सत्ता आपके हाथ से                                 जाएगी या फिर इस जंगल में आप अकेले रह जायेंगे। 

शेर राज :-              तो मैं अपनी सत्ता बचाने के लिए क्या करू बन्दर स्वामी?
बन्दर :-                  महाराज आप उस लक्क्ड़बग्घे के बच्चे को माफ़ कर दो और उसे बड़ा-सा कोई इनाम भी                                  दे दो। पुरे जंगल में यह बात फैल जाएगी कि देखो शेर राज की शकल कितनी शुभ है                                        सवेरे-सवेरे लक्क्ड़बग्घे के बच्चे ने उनकी शकल क्या देखी उसे न सिर्फ जीवन-दान मिला                                  बल्कि शेर राज की तरफ से इतना बड़ा इनाम भी मिला। इससे सब के विचार आपके प्रति                                 पॉजिटिव हो जायेंगे और सभी सवेरे-सवेरे आपके दर्शन करने आएंगे। 

सियार :-                अबे! क्या बक रहा है?
शेर राज :-              बक नहीं रहा है। यह सही कह रहा है। 

फिर शेर राज सबके सामने एलान करने के लिए सब को बुलाता है। 

शेर राज :-                हम शेर राज पुरे होश और हवाश में ये घोषणा करते है कि मिस्टर एंड मिसिस                                                  लक्क्ड़बग्घा के बच्चे को न सिर्फ जीवन दान देते है बल्कि आजीवन उसके खाने के लिए                                    हम हमारी तरफ से भरपूर मांस भी देंगे। 
बन्दर :-                   वाह महाराज! शेर राज महाराज की जय हो। शेर राज महाराज की जय हो। 
शेर राज :-                मिस्टर एंड मिसिस लक्क्ड़बग्घा, आज मेरी समझ में आ गया है कि मनहूस शकल जैसा                                      कुछ नहीं होता। यह सब हमारा अंधविश्वास होता है जिसे हम अपना काम न पूरा होने पर                                    किसी के प्रति पाल लेते है। 

कहानी की सीख :-  मनहूस शकल जैसा कुछ नहीं होता है। यह बस एक अंधविश्वास है जिसे हम काम न पूरा होने पर किसी के प्रति पाल लेते है।

हमे ज़रूर बताइयेगा कि क्या आप भी कभी इस मनहूस शकल जैसे किसी अन्धविश्वास का शिकार हुए है?

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