एल्वेस की जादुई कहानी-Elves Ki Jadui Kahani

यह हिंदी कहानी एल्वेस की जादुई कहानी है। आइये देखते है कि वो तीन एल्वेस किसकी और कैसे मदद करते है। 

बहुत साल पहले कही दूर एल्वेस की ज़मीन पर तीन एल्स रहा करते थे। ये एल्वेस अच्छे दिल वाले संत बनने के लिए तैयार थे और अब निकले थे मनुष्यों की दुनिया की यात्रा करने के लिए।

एल्वेस की जादुई कहानी-Elves Ki Jadui Kahani

पहला एल्वेस :- हमारा कर्तव्य हमारा इंतज़ार कर रहा है दोस्तों।

दूसरा एल्वेस :- मैं बहुत ही उत्साहित हुँ। हम भी मनुष्यों की दुनिया देखेंगे। हां।

तीसरी एल्वेस :- मैं चाहती हुँ कि हर एक व्यक्ति बहुत खुश रहे।

और एल्वेस ने प्रवेश किया। एक पुराने घर में एक बूढ़ा आदमी और उसकी पत्नी रहते थे। बूढ़े आदमी ने अपने घर की कार्यशाला में जूते बना कर घर चलाया था कभी-कभी उसने पुराने जूतों की मरम्मत भी की। जूतों वाला कमाए हुए पैसो से नए जूते बनाने के लिए एक चमड़ा खरीद कर लाता था। एक दिन उसने अपने कमाए हुए पैसो से चमड़े खरीदे और वो घर पहुँचा।

उसने जो चमड़ा खरीदा था वो जूते के एक जोड़ी बनाने के लिए पर्याप्त था। उसने टेबल पर चमड़े के टुकड़े को छोड़ कर कमरे को बंद कर दिया और अपने शयन कक्ष में चला गया। सुबह जब वो जगा उसने अपने बिस्तर पर बैठ कर ज़ोरदार आलस दिया। उसने जूते के प्रकार के बारे में सोचा जो वो बनाने जा रहा था और हर सुबह की तरह उसने नाश्ता खाया जो पत्नी ने बनाया था

बूढ़ा :- डिअर, आपका बहुत-बहुत शुक्रिया। मुझे अब काम पर जाना चाहिए।आज मैं बहुत ही अच्छे जूते बनाऊंगा।

पत्नी :- कल रात आपने जूते की एक जोड़ी बनाई। क्या आपके पास एक और जोड़ी बनाने के लिए पर्याप्त चमड़ा है?

बूढ़ा आदमी हैरान रह गया क्योंकि वो जानता था कि उसने कल रात सोने से पहले कोई जूता नहीं बनाया। इसलिए बूढ़ा आदमी अपनी कार्यशाला में भाग के गया। उसकी पत्नी भी उसके पीछे गयी। जैसे ही उसने दरवाज़ा खोला तो क्या देखता है? चमड़े का टुकड़ा जो उसने सोने से पहले रात को टेबल पर छोड़ा था वो अब बहुत सुन्दर जूतों में बदल गया था। जूतों वाले की आँखे यह देख कर फ़टी की फ़टी रह गयी।

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एल्वेस की जादुई कहानी-Elves Ki Jadui Kahani

बूढ़ा :- मैंने ये जूते कब बनाये? मुझे याद नहीं आ रहा। मुझे लगता है मैं सच में बूढ़ा हो गया हुँ।

जूते इतने सुन्दर थे कि जूते वाले ने तुरंत उन्हें खिड़की के सामने रखा और ग्राहक का इंतज़ार करने लगा। कुछ ही समय में एक अमीर दिखने वाले ग्राहक ने खिड़की से जूतों को देखा और अंदर आया।

ग्राहक :- सुप्रभात। मैं खिड़की के सामने रखे जूतों की जोड़ी खरीदना चाहता हुँ। उसकी कीमत चाहे कितनी भी हो। मैंने आज तक इतने सुन्दर जूते कभी नहीं देखे।

बड़ी ख़ुशी से बूढ़े आदमी ने जूतों की जोड़ी बेचीं और उसने उसकी सही कीमत से ज़्यादा कुछ नहीं माँगा। इस बार जूते वाला जूतों के दो जोड़े के लिए चमड़े लेने बाजार जा रहा था और फिर उसने टेबल पर चमड़े को छोड़ दिया और कमरे में चारो ओर घूम आया। चमड़े के टुकड़ो पर एक नज़र और डाली और बिस्तर पर चला गया।

जैसे ही वो जागा वो सीदे अपनी कार्यशाला में गया। इस बार अदबुध जूतों के दो जोड़े टेबल पर थे। इस बार फिर जूते वाला बहुत खुश था। उसने जूतों को खिड़की के सामने रखा। उसी दिन उसने जूतों के दोनों जोड़े बहुत अच्छी कीमत में बेच दिए और वो फिर से और अधिक चमड़े खरीदने के लिए चला गया।

मन ही मन वो सोच रहा था कि जूतों के वो सुन्दर जोड़े कौन बना रहा है। उसने चमड़े को मेज़ पर रखा और अपने कमरे में गया। सुबह उसके पास मेज़ पर जूतों का ढ़ेर था। जूते वाले ने उस दिन सारी जोडिया बेच दी।

बहुत लम्बे समय तक बूढ़ा आदमी जूतों से बने पैसो से घर चला रहा था। कमाए हुए कुछ पैसो से उसने चमड़ा खरीदना जारी रखा। लेकिन जूते वाला जानने के लिए उत्सुक था कि जूतों के इन जोड़ो को कैसे और कौन बना रहा है। आखिर एक रात उन्होंने अपनी कार्यशाला की कोठरी में छुपने का फैसला किया और पता लगा ही लिया की जूते कौन बना रहा है।

बूढ़ा :- आज रात मैं जूते बनाने वालो को ढूंढ कर ही रहूंगा।

एल्वेस की जादुई कहानी-Elves Ki Jadui Kahani

मध्य रात्रि की समय कार्यशाला की खिड़की खोली गयी और एल्वेस ने प्रवेश किया। एल्वेस में से एक गलती से फूलदान पर कूद गया। शोर सुन कर बूढ़ा आदमी जाग गया।

पहला एल्वेस :- ज़रा सावधान रहिये। वो जाग जायेंगे।

जब बूढ़े आदमी ने दरवाज़े को धक्का दिया और चुपके से बाहर झाकने लगा तो उसे अपनी आँखों पे यकीन नहीं हुआ। उसने अपनी आँखों को रगड़ा। फिर से देखा और उसने देखा कि मेज़ पर तीन एल्वेस थे। वे नृत्य और काम एक साथ ही कर रहे थे। उनमे से एक ने चमड़ा काटा। दूसरा सिलाई कर रहा था और तीसरा उन्हें चिपका रहा था। फिर उन्होंने लैस को बाँध दिया और जूते को पोलिश किया।

एल्वेस इतनी तेज़ी से काम कर रहे थे कि पलक झपकते ही टेबल पर जूतों के अनगिनत ढेर थे।

एक एल्वेस :- वो सब सुन्दर है।

दूसरा एल्वेस :- चलो किसी के जागने से पहले निकल जाते है।

जैसे ही वो आये थे वैसे ही एल्वेस चले गए। हस्ते-खेलते नृत्य करते-करते। जूते वाला अपनी छिपी हुई जगह से बाहर आया। वो अपनी पत्नी के पास भागते हुए गया और जो कुछ हुआ उसे सब बताया। स्वभाविक है, उसकी पत्नी ने जो कुछ सुना उस पर उसे यकीन नहीं हुआ। लेकिन जब उसने टेबल पर रखे जूतों के अनगिनत जोड़ो को देखा तो उसे यकीन हो गया क्योंकि उसे पता था कि उसका पति एक रात में इतने जूते नहीं बना सकता।

एल्वेस ने जो भी किया उसके लिए उन्हें धन्यवाद देने की बात पर दोनों सहमत हुए। अगले दिन जूते वाले की पत्नी ने दावत तैयार की। मध्य रात्रि में एल्वेस वर्कशॉप में पहुँचे तो उन्होंने मेज़ पर दावत देखी।

पहला एल्वेस :- अरे! ये खाना तो देखो। कही ये हमारे लिए तो नहीं बनाया गया।

दूसरी एल्वेस :- बेशक ये हमारे लिए है। मुर्ख। अन्यथा वे इस समय क्यों लाएंगे।

पहला एल्वेस :- मुझे लगता है हमारा इस घर का मिशन पूरा हुआ। अब हमे दूसरे घरो में जाना चाहिए जिन्हे  हमारी मदद की ज़रूरत हो।

जूते वाला और उसकी पत्नी जाग गए और कार्यशाला में गए। उन्होंने जो खाना छोड़ा था उसकी जगह पर उन्होंने चमकदार जूतों का ढेर देखा। उस दिन के बाद एल्वेस कभी वापिस नहीं आये। बूढ़े जूते वाले और उनकी पत्नी ने अपने शेष जीवन के लिए पर्याप्त पैसे प्राप्त कर लिए थे। जूते वाले ने सोचा कि सालों की मेहनत के बाद उसे यह अवार्ड मिला है। यही कारण है कि उसने जूते बनाना कभी बंद नहीं किया और जब उन्होंने छोटे एल्वेस के बारे में सोचा वो हमेशा उनके लिए कृतज्ञ और आभारी थे।

कहानी की सीख़ :-  हमें मेहनत करना कभी नहीं छोड़ना चाहिए। हमारी मेहनत का फल हमें एक न एक दिन ज़रूर मिलता है।

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